Tuesday, November 29, 2022
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US वुमन डिप्लोमैट्स ने भारतीय सड़कों पर दौड़ाया ऑटो: भारत आने के बाद ऑटो खरीदा, अब इसी से ऑफिस जाती हैं


नई दिल्ली17 मिनट पहले

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भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित अमेरिकी एंबेसी की 4 महिला अधिकारी ऑटो चलाकर ऑफिस जाती हैं। खास बात तो ये हैं कि ये ऑटो इनका पर्सनल व्हीकल है। इसी से वे ऑफिस जाती हैं।

एन एल मेसन, रूथ होल्म्बर्ग, शरीन जे किटरमैन और जेनिफर बायवाटर्स का कहना है कि ऑटो चलाना सिर्फ मजेदार ही नहीं बल्कि ये एक उदाहरण है कि अमेरिकी अधिकारी भी आम लोगों की तरह ही हैं।

दिल्ली में स्थित अमेरिकी एंबेसी की चारों महिला अधिकारी। बाएं से- रूथ होल्म्बर्ग, जेनिफर बायवाटर्स, शरीन जे किटरमैन और मेसन (सामने बैठी हैं)।

दिल्ली में स्थित अमेरिकी एंबेसी की चारों महिला अधिकारी। बाएं से- रूथ होल्म्बर्ग, जेनिफर बायवाटर्स, शरीन जे किटरमैन और मेसन (सामने बैठी हैं)।

ऑटो को दिया पर्सनल टच, ब्लूटूथ डिवाइस लगवाया
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए इन अमेरिकी डिप्लोमैट एन एल मेसन ने कहा- मैंने कभी भी क्लच वाली गाड़ियां नहीं चलाई। मैं हमेशा ऑटोमैटिक कार ही चलाती हूं, लेकिन भारत आकर ऑटो चलाना एक नया एक्सपीरिएंस था। जब में पाकिस्तान में थी तब मैं बड़ी और शानदार बुलिटप्रूफ गाड़ी में घूमती थी। उसी से ऑफिस जाती थी। लेकिन जब मैं बाहर ऑटो देखती थी तो लगता था कि एक बार तो इसे चलाना है। इसलिए जैसे ही भारत आई तो एक ऑटो खरीद लिया। मेरे साथ रूथ, शरीन और जेनिफर ने भी ऑटो खरीदा।

मेसन ने कहा- मुझे मेरी मां से इंस्पिरेशन मिली। वो हमेशा कुछ नया करती रहती थीं। उन्होंने मुझे हमेशा चांस लेना सिखाया। मेरी बेटी भी ऑटो चलाना सिख रही है। मैंने ऑटो को पर्सनलाइज किया है। इसमें ब्लूटूथ डिवाइस लगा है। इसमें टाइगर प्रिंट वाले पर्दे भी लगे हैं।

चारों वुमन डिप्लोमैट्स ऑटो चलाकर अन्य महिलाओं को भी मोटिवेट करती हैं।

चारों वुमन डिप्लोमैट्स ऑटो चलाकर अन्य महिलाओं को भी मोटिवेट करती हैं।

मैक्सीकन एंबेसडर के पास भी था ऑटो
भारतवंशी अमेरिकी डिप्लोमैट शरीन जे किटरमैन के पास पिंक कलर का ऑटो है। इसके रियर-व्यू मिरर में अमेरिका और भारत के झंडे लगे हुए हैं। उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। बाद में वो अमेरिकी में बस गईं। उनके पास US सिटीजनशिप है।

उन्होंने कहा- मुझे इंस्पिरेशन एक मैक्सीकन एंबेसडर मेल्बा प्रिआ से मिला। 10 साल पहले उनके पास एक सफेद रंग का ऑटो था। उनका ड्राइवर भी था। जब मैं भारत आई तो देखा मेसन के पास ऑटो है। तभी मैंने भी एक ऑटो खरीद लिया।

भारतवंशी अमेरिकी डिप्लोमैट शरीन जे किटरमैन अपने पिंक कलर के ऑटो में घूमती हैं।

भारतवंशी अमेरिकी डिप्लोमैट शरीन जे किटरमैन अपने पिंक कलर के ऑटो में घूमती हैं।

लोगों से मिलना एक तरह की डिप्लोमेसी : रूथ होल्म्बर्ग
अमेरिकी अधिकारी रूथ होल्म्बर्ग ने कहा- मुझे ऑटो चलाना बहुत पसंद है। मैं मार्केट भी इसी से जाती हूं। यहां लोगों से मिलती हूं। महिलाएं मुझे देखकर मोटिवेट भी होती हैं। मेरे लिए डिप्लोमेसी हाई लेवल पर नहीं है। डिप्लोमेसी का मतलब है लोगों से मुलाकात करना, उन्हें जानना और उनके साथ एक रिलेशनशिप बिल्ड करना। ये सब मैं ऑटो चलाते हुए कर सकती हूं। मैं हर दिन लोगों से मुलाकात करती हूं। ये डिप्लोमेसी के लिए जरूरी है।

नई चीजें सीखना मुश्किल नहीं है : जेनिफर बायवाटर्स
ऑटो चलाने के अपना एक्सपीरिएंस बताते हुए जेनिफर ने कहा- मैंने लोगों की अच्छाई देखी है। कई बार लोगों को जानने के लिए आपको आउट ऑफ द बॉक्स सोचना पड़ता है। जब मैं दिल्ली आई तो मैं मेसन के साथ ऑटो में जाती थी। बाद में मैंने अपनी ऑटो खरीद लिया। इसे चलाना मुश्किल था, लेकिन मैंने सीखा।

सीखना उतना मुश्किल नहीं होता पर सबसे ज्यादा मुश्किल आस-पास चल रही गाड़ियों को ध्यान में रखकर ड्राइविंग करने में होती है। यहां कोई-भी कहीं से भी अचानक आ जाता है। ये कभी-कभी डरावना हो जाता है लेकिन इसमें काफी मजा आता है।

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