Wednesday, December 7, 2022
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सुमित कौल से खास बातचीत: बोले- मैं सबसे यही कहता हूं कि सेट पर तभी आऊंगा, जब मुझे कोई विलेन नहीं बुलाएगा


3 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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सुमित कौल स्टारर वेब सीरीज ‘तनाव’ सोनी लिव पर स्ट्रीम होने वाली है, जिसका डायरेक्शन सुधीर मिश्रा और सचिन कृष्ण ने किया है। इसके अलावा सुधीर मिश्रा के साथ ही सुमित ने फिल्म ‘अफवाह’ भी शूट की है। अब हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान सुमित कौल ने ‘तनाव’ के बारे में बात की और बताया कि इस फिल्म में उन्होंने 2 डायरेक्टर्स के साथ काम किया है। सुमित ने आगे बताया कि उन्होंने 80% सुधीर और 20% सचिन के डायरेक्शन में काम किया है। आइए देखते हैं सुमित से बातचीत के प्रमुख अंश:-

तनाव सीरीज में आपका किरदार उमर रियाज पॉजिटिव है या नेगेटिव है?

मैं किसी भी किरदार को पॉजिटिव या निगेटिव नजरिए से नहीं देखता हूं। कैरेक्टर को इंसानी रूप से देखता हूं, इसलिए जब भी सेट पर मुझे कोई कहता है कि देखो, विलेन आ गया, तब यही कहता हूं कि सेट पर तभी आऊंगा, जब कोई मुझे विलेन नहीं बुलाएगा। मैं अपनी कहानी का हीरो हूं। हम सब अपने जीवन में जद्दोजहद से गुजरते हैं। मेरा किरदार उमर रियाज कश्मीरी है। उसे लगता है कि उसके परिवार और उसके वतन कश्मीर के साथ नाइंसाफी हो रही है। उन्हें आजादी का हक है। वो ऊपर वाले पर विश्वास करता है। वो आजादी के लिए लड़ता है। मेरे हिसाब से वो न गलत है और न सही है। उसके कर्म सही और गलत हो सकते हैं।

नेगेटिव किरदार निभाते हैं, तब उसकी संतुष्टि कैसे पाते हैं?

मैं किरदारों को बतौर एक्टर नहीं देखता हूं। मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि वो किरदार लिखा कैसे गया है। कैरेक्टर गलत या सही, जो भी कर रहा है, उसके पीछे की मंशा क्या है। अगर स्क्रिप्ट उस कॉन्फ्लिक्ट को बयां करती है, तब उस किरदार की तरफ ज्यादा आकर्षित होता हूं। ऐसे किरदार करने में मुझे ज्यादा मजा आता है। मुझे लगता है कि उमर रियाज उसी तरह का किरदार है, जिसमें बहुत ज्यादा लेयर हैं। इसकी कहानी बहुत गहराई से लिखी गई है। वो जीता जागता इंसान है। कई बार हम चीजों को गलत या सही बड़ी आसानी से कह देते हैं, लेकिन ये नहीं सोचते कि अगर वो उस हालात में जिया होता, तब बिल्कुल मु्मकिन नहीं है कि वैसा नहीं करते, जैसा वो कर रहा है।

इस सीरीज में दो डायरेक्टर हैं। आपने किसके डायरेक्शन में काम किया है?

मैंने सुधीर मिश्रा और सचिन कृष्ण, दोनों के डायरेक्शन में काम किया है। अगर देखा जाए, तब मेरा 80% शूट सुधीर मिश्रा के डायरेक्शन में हुआ। लेकिन पहले से ऐसी कोई सोची-समझी प्लानिंग नहीं थी। मैं कहूंगा कि दोनों के शूट करने का तरीका एकदम अलग है, लेकिन दोनों डायरेक्टर का किरदार और शो को देखने का नजरिया बिल्कुल एक जैसा था। इसलिए मुझे अपने आपको बदलना नहीं पड़ा। वैसे पहले मैं टेंशन में था कि दो डायरेक्टर के साथ काम कैसे होगा। क्योंकि एक डायरेक्टर के साथ काम करने की कोई आदत हो जाएगी, तब दूसरे डायरेक्टर के साथ वो कैसे होगी, लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ।

रियल लाइफ में तनाव को कैसे हैंडल करते हैं?

हमारे अंदर जो खुशी, गम होता है, उसकी बागडोर हम बेवजह किसी दूसरे के हाथ देते हैं। जैसे कहूं कि दुखी इसलिए हूं कि किसी ने मेरे परफॉर्मेंस की बुराई कर दी या खुश इसलिए हूं कि मेरी पत्नी ने मुझे अच्छा कह दिया। अगर अपने अंदर बैलेंस बनाकर रख सकूं, तब बाहर जो हो रहा है, वो आपको कम तनाव देगा। ऐसी उम्मीद में जीने की कोशिश करता हूं। फिर भी जीवन में कभी-कभार हो जाता है, तब अपने आपको याद दिलाता हूं कि सुमित बागडोर अपने हाथ में है। फिर मैं इस तरह तनाव को हैंडल करता हूं।

OTT पर ज्यादा काम मिलने पर बतौर एक्टर कैरियर में किस तरह से फर्क पड़ा है?

बेशक, मौके ज्यादा मिल रहे हैं। उसी बात की बतौर आर्टिस्ट बड़ी खुशी होती है, क्योंकि अब थोड़ा च्वाइस बढ़ गई है। अब तय कर सकता हूं कि किस फिल्म या शो का हिस्सा बनना चाहूंगा। उस बात की खुशी है। इस बात की भी खुशी है कि सिर्फ एक तरह कहानियां नहीं बन रही हैं। अब OTT और सिनेमा के बीच जद्दोजहद के चलते नए डायरेक्टर, क्रिएटर, राइटर आने लगे हैं। ऐसे में बतौर आर्टिस्ट एक्सपेरिमेंट और एक्सप्लोर करने का मौका मिल रहा है।

बतौर वाइस आर्टिस्ट आप क्या कर रहे हैं?

वाइस मेरी रोजी रोटी है। तरह-तरह की चीजें होती रहती हैं। अभी OTT पर एक बहुत अच्छी फिल्म ‘जोगी’ आई थी, उसमें मैंने दलजीत जी के किरदार को अंग्रेजी में आवाज दी थी। इसके अलावा बहुत OTT प्लेटफॉर्म के प्रोजेक्ट को अंग्रेजी को हिंदी में आवाज देता रहता हूं। एड् भी करता रहता हूं। मेरे पास जब एक्टिंग में कुछ काम नहीं होता है, तब वो मुझे क्रिएटिवली सर्टिफाइड रहने का मौका देता है। हर दूसरे दिन कुछ नया चलता रहता है। अब तक 100 से 125 फिल्मों की डबिंग कर चुका हूं। इसके अलावा बहुत सारे प्रोग्राम्स, एनिमेशन और एड् कर भी चुका हूं। बड़ा मजा आता है कि अगर किसी किरदार को जीने का मौका न मिले, तब उसको अपनी आवाज के जरिए जी सकते हैं।

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