Friday, December 2, 2022
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लैपटॉप कंपनी HP 6000 एम्प्लॉइज को निकालेगी: कंपनी की सेल्स में गिरावट आई, महंगाई और मंदी की चिंता


नई दिल्ली26 मिनट पहले

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मेटा, ट्विटर और अमेजन के बाद अब एक और टेक कंपनी ने जॉब कट का फैसला किया है। लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफ्रैक्चरर हैवलेट पैकर्ड यानी HP इंक लगभग 6,000 लोगों को निकाल सकती है। ये उसकी टोटल वर्कफोर्स का करीब 12% है। HP में अभी 50,000 से ज्यादा एमप्लॉइज है। हालांकि कंपनी का छंटनी का ये प्लान 2025 तक पूरा करने का है।

HP ने अपनी वित्तीय वर्ष 2022 की फुल ईयर रिपोर्ट के दौरान ये घोषणा की है। कोरोना महामारी के दौरान पीसी और लैपटॉप सेगमेंट में जोरदार उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब बिक्री में कमी आई है जिस कारण HP ने एम्प्लॉइज की संख्या में कटौती का फैसला किया है। ग्लोबल मार्केट में महंगाई और मंदी की चिंता भी जॉब कट के कारणों में से एक हो सकता है।

रेवेन्यू साल दर साल 0.8% घटा
HP ने कहा कि चौथी तिमाही में रेवेन्यू साल दर साल 0.8% घटकर 14.80 बिलियन डॉलर हो गया। पर्सनल सिस्टम सेगमेंट में रेवेन्यू, जिसमें पीसी शामिल हैं, 13% गिरकर 10.3 बिलियन डॉलर हो गया। प्रिंटिंग रेवेन्यू 7% कम होकर 4.5 बिलियन डॉलर हो गया।

ट्विटर, मेटा, अमेजन में भी छंटनी
HP से पहले ट्विटर ने करीब 50% एम्प्लॉइज को निकाला है, जबकि मेटा ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी करते हुए 11,000 लोगों को निकाला है। वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स में दावा किया गया है कि अमेजन में भी 10,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की जा चुकी है। अमेजन ने खुद भी अगले साल तक छंटनी जारी रहने की जानकारी दी है।

गूगल में जल्द होगी छंटनी
बीते दिन खबर आई थी कि गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट 10,000 एम्प्लॉइज की छंटनी कर सकती है। इंफॉर्मेशन की एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया था। मार्केट कंडीशन और कॉस्ट कटिंग के कारण ऐसा किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक गूगल मैनेजर्स को ‘खराब प्रदर्शन’ करने वाले कर्मचारियों का विश्लेषण करने और उन्हें रैंक देने के लिए कहा गया है।

मंदी और जॉब का कनेक्शन
मंदी की शुरुआत में, जैसे-जैसे कंपनियां कम मांग, घटते मुनाफे और ऊंचे कर्ज का सामना करती हैं, कई कंपनिया कॉस्ट कटिंग करने के लिए एम्प्लॉइद की छंटनी शुरू कर देती हैं। बढ़ती बेरोजगारी कई संकेतकों में से एक है जो मंदी को परिभाषित करती है। मंदी में कंज्यूमर कम खर्च करते हैं और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन भी धीमा हो जाता है।

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