Wednesday, December 7, 2022
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यूक्रेन में टारगेट मिस कर रही अमेरिकी मिसाइल: रूस के रडार सिस्टम को तबाह करने की बजाए खुद के लोगों को किया जख्मी


वॉशिंगटन2 मिनट पहले

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26 सितंबर, शाम के 6 बजे यूक्रेन ने AGM-88B मिसाइल लॉन्च की। मकसद रूस के रडार सिस्टम को तबाह करना था, लेकिन इसने अपना टारगेट मिस कर दिया । इसके चलते यह मिसाइल पूर्वी यूक्रेन के क्रमाटोर्स्क इलाके में जा गिरी जहां तीन लोग घायल हो गए। 24 नवंबर को अपनी एक रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसका खुलासा किया है। यह मिसाइल यूक्रेन को रूस का सामना करने के लिए अमेरिका ने दी थी।

इंवेस्टिगेशन में सामने आया है कि सितंबर में यूक्रेन की तरफ से दागी गई मिसाइल ने खाली अपार्टमेंट को हिट किया था। पिछले 9 महीनों से चल रही रूस-यूक्रेन वॉर में यह पहला ऐसा मामला है जब अमेरिका में बनी किसी मिसाइल ने टारगेट मिस किया हो। AGM-88B एक हाई स्पीड एंटी रेडिएशन मिसाइल है जो ग्राउंड टारगेट को तबाह करने के लिए दागी जाती है। इसका मुख्य काम एयर डिफेंस सिस्टम और रडार सिस्टम को तबाह करने का होता है।

रूस से निपटने के लिए यूक्रेन को लगातार अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों से मिसाइलें मिल रही हैं।

रूस से निपटने के लिए यूक्रेन को लगातार अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों से मिसाइलें मिल रही हैं।

लोगों को रूस ही नहीं अपनी मिसाइलों से भी लग रहा डर

यूक्रेन के जिस डोनबास इलाके में यह मिसाइल गिरी वहां लगातार रूसी हवाई हमले होते रहते हैं। वहां के लोगों के मुताबिक अब उन्हें अपनी मिसाइलों से भी डर लग रहा है। एक महिला ने बताया कि अब वो लोग थोड़ी सी आवाज होने पर डर जाते हैं। हालांकि यूक्रेन की डिफेंस मिनिस्ट्री ने इस मामले में कोई भी जवाब देने से इंकार कर दिया है।

इस महीने यूक्रेन की तऱफ से मिसफायर हुई थी मिसाइल

इसी महीने नवंबर में भी यूक्रेन की 2 मिसाइलें मिस फायर होने के कारण पोलैंड में गिरी थी। इस मिस फायर में 2 लोगों की मौत हुई थी। शुरूआत में माना जा रहा था कि यह मिसाइल रूस ने दागी है। हालांकि बाद में खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन, नाटो चीफ और पोलैंड के प्रेसीडेंट ने रूस को क्लीन चिट दे दी थी। प्राइमरी इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि ये मिसाइलें यूक्रेनी सैनिकों की जवाबी कार्रवाई के बाद पोलैंड में गिरी हैं।

क्यों यूक्रेन के लिए घातक हो सकते हैं ऐसे मिस फायर

हालांकि जांच में इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि यूक्रेन ने जानबूझ कर ऐसा किया था। इसके बावजूद अगर ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं तो इससे युक्रेन को कई तरह से नुकसान होने की संभावना है।

  • सबसे बड़ा नुकसान तो यही होगा की इससे लगातार यूक्रेन के लोगों की जान को ही खतरा रहेगा।
  • दूसरा बड़ा नुकसान होगा की रूस अंतर्राष्ट्रीय स्टेज पर इस तरह के मिस फायर को यूक्रेन की छवि बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल करेगा।
  • यूक्रेन लगातर रूस पर आरोप लगाता रहा है कि वो अपने हमलोंं में सार्वजनिक जगहों को निशाना बना रहा है। जिसमें अपार्टमेंट्स, स्कूल और अस्पताल शामिल हैं। इस बीच यदि यूक्रेन की मिसाइल टारगेट मिस करती हैं और लोगों को किसी तरह नुकसान होता है तो वो रूस पर इस तरह के कोई आरोप नहीं लगा पाएंगे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस खुद सार्वजनिक जगहों पर हमला कर यूक्रेन पर उसका आरोप लगा रहा है।

हालांकि डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी के मुताबिक इस तरह से किसी मिसाइल का टारगेट मिस करना कोई नई बात नहीं है। बड़े स्तर पर हो रहे किसी भी युद्ध के दौरान ऐसा होना आम बात है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस इस तरह की घटनाओं को ज्यादा फायदा नहीं उठा पाएगा। इसकी मुख्य वजह रूस के ताबड़तोड़ हवाई हमले हैं। रूस लगातार यूक्रेन के सिविलियन इलाकों को टारगेट कर रहा है। इसके कारण उसके खिलाफ काफी सुबूत पहले से ही मौजूद हैं।

जनवरी में अमेरिका ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा यूक्रेन के लिए भेजा था।

जनवरी में अमेरिका ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा यूक्रेन के लिए भेजा था।

भारत से मिस फायर हुई मिसाइल पाकिस्तान में गिरी

भारत की एक मिसाइल 9 मार्च को पाकिस्तान में 124 किलोमीटर अंदर उसके शहर चन्नू मियां के पास जा गिरी। भारत का कहना है कि तकनीकी गड़बड़ी की वजह से ऐसा हुआ। पाकिस्तानी मिलिट्री के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस ने ये पकड़ लिया था कि सिरसा से कोई हाई स्पीड ऑब्जेक्ट पहले भारत में उड़ने और फिर हवा में रास्ता बदलकर पाकिस्तानी इलाके में घुस गया है। इसके बाद पाकिस्तानी एयरफोर्स स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर का पालन करते हुए लगातार इस ऑब्जेक्ट की निगरानी करता रहा, लेकिन इस दौरान पाकिस्तान ये नहीं जान पाया कि ये ऑब्जेक्ट एक मिसाइल है।

एक्सर्ट्स के मुताबिक, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मिसाइल की तेज स्पीड से इसके खिलाफ तुरंत कुछ कर पाना मुश्किल था। साथ ही शांति काल के समय किसी भी देश के लिए अचानक प्रतिक्रिया दे पाना मुश्किल होता है। इसलिए पाकिस्तानी सेना इसका जवाब नहीं दे पाई।

वियतनाम वॉर के बाद बनाई गई थी AGM-88

दुश्मन देश की एयर डिफेंस मिसाइल साइट्स को तबाह करने के लिए वियतनाम वॉर के बाद यूएस नेवी और एयरफोर्स ने AGM-88 को डेवेलेप किया था। एक बार लॉन्च होने के बाद मिसाइल आस-पास मौजूद इलेक्ट्रोमैग्निटक रेडिएशन को ढूंढ़ती है। जो दुश्मन देश की एयर मिसाइल साइट्स के रडार सिस्टम से निकल रही होती हैं। अपने टारगेट पर पहुंचने पर मिसाइल अपने वॉरहेड में लगे 40 पाउंड के विस्फोटक के साथ फट जाती है।

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