Thursday, December 8, 2022
HomeWorld Newsबेवजह की शॉपिंग करना दिमागी परेशानी: इसके लिए दवाएं और परवरिश जिम्मेदार,...

बेवजह की शॉपिंग करना दिमागी परेशानी: इसके लिए दवाएं और परवरिश जिम्मेदार, छोटी कोशिशों से बदलेगा व्यवहार


वॉशिंगटन31 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

बिना जरूरत के खरीदारी करना आमतौर पर कुछ लोगों की आदत मानी जाती है, लेकिन ये आदत उनके शौक से ज्यादा उनकी दिमागी परेशानी है। दरअसल दिमाग एक तरह का डोपामाइन रिलीज करता है, जो खरीदारी के लिए मजबूर करता है। कई बार किसी दूसरी बीमारी के इलाज के लिए खाई जा रही दवाओं की वजह से डोपामाइन रिलीज होता है जैसे पार्किंसन की दवाएं। ये दवाएं खरीदारी के लिए प्रेरित करती हैं।

बेवजह की खरीदारी की एक वजह परवरिश

बचपन के माहौल से खरीदारी की आदत तय होती है।

बचपन के माहौल से खरीदारी की आदत तय होती है।

अमेरिका में हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी की न्यूरोसर्जन ऐन क्रिस्टीने दुहैम अपनी किताब ‘माइंडिंग क्लाइमेट: हाऊ न्यूरोसाइंस कैन हेल्प सॉल्व ऑवर एनवायर्नमेंटल क्राइसिस’ में कहती हैं- बेवजह की खरीदारी की दूसरी वजह परवरिश है। कोई किस माहौल में पला है और उसने खरीदारी को बचपन में किस तरह देखा है। इससे भी उसकी खरीदारी की आदत तय होती है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी ने बचपन से बार-बार यह सुना है कि ज्यादा खरीदारी इंसान को कंगाल बना देती है, तो वह बड़ा होकर कम खर्चीला होता है। अगर उसके माता-पिता ऐसे न भी हों तो भी। यदि किसी ने बचपन में सुना है कि ज्यादा खर्च कर बेहतर जिंदगी जी जाती है, तो वह बड़ा होकर बेवजह की खरीदारी करता है।

चेनस्मोकर्स बिना जरूरत खरीदारी करते हैं

कोई भी चीज रिवॉर्ड के लिए मत खरीदिए। जैसे सेल जैसी स्कीम।

कोई भी चीज रिवॉर्ड के लिए मत खरीदिए। जैसे सेल जैसी स्कीम।

दुहैम अपनी किताब में एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताती हैं कि सिगरेट पीने वाले युवा जो अपनी तलब नहीं रोक पाते और जिनके परिवार में जुआरी रहे हों, वे भी बिना जरूरत के खरीदारी करते हैं। दिमाग खरीदारी के लिए कैसे प्रेरित होता है ये बताने के लिए भी उन्होंने किताब में उदाहरण दिए हैं।

आपने कहीं वॉटर कलर के बारे में पढ़ा और आपको अपनी चित्रकारी का शौक याद आया। आपने ऑनलाइन देखा और यह सस्ता लगा। आपने खरीद लिया। अगले दिन कोई घर के पास वॉटर कलर बेचने आया। आपको उसकी क्वालिटी ज्यादा बेहतर लगी। आपका दिमाग फिर खरीदने के लिए कहेगा। दिमाग ऐसे ही काम करता है।

खुद को चैलेंज दें, धीरे-धीरे खरीदारी बंद करें

  • एकदम से खरीदारी बंद मत कीजिए। ऐसा करने से रिवेंज बाइंग करने लगेंगे।
  • कोई भी चीज रिवॉर्ड के लिए मत खरीदिए। जैसे एक पर एक फ्री जैसी स्कीम।
  • नए कपड़े खरीदने की बजाय खुद को पुराने कपड़ों में फिट होने का चैलेंज दें।
  • हफ्ते में कोई एक दिन ऐसा तय कीजिए, जिस दिन आप कुछ नहीं खरीदेंगे।

खबरें और भी हैं…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments