Friday, December 2, 2022
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बाहुबली की देवसेना का मेकअप करने वाली चारू: शादी के लिए जमा पैसों से अमेरिका में किया मेकअप कोर्स, सालभर तक रोज भरा 1500 का जुर्माना


एक दिन पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

आज हम आपको मिलाएंगे चारू खुराना से। ये नाम आपने कम ही सुना होगा। लेकिन, ये वो हैं जिसने देश की फिल्म इंडस्ट्री के निजाम को बदल डाला। साल 2014 के पहले तक देश की किसी फिल्म इंडस्ट्री में महिला मेकअप आर्टिस्ट नहीं होती थीं।

ये चौंकाने वाली बात है, लेकिन सच है। मेकअप आर्टिस्ट्स एसोसिएशन में कोई महिला मेकअप आर्टिस्ट रजिस्टर्ड नहीं थी। हीरो और हीरोइन दोनों का मेकअप पुरुष ही करते थे, फिर चाहे मेकअप सिर्फ चेहरे को हो या फुल बॉडी हो। इस पुरुषों वाले एसोसिएशन में जगह बनाने के लिए चारू को चार साल लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।

चारू ने पहली बार बॉलीवुड में बतौर मेकअप आर्टिस्ट घुसने की कोशिश की तो एसोसिएशन ने उसे हिमाकत माना और तरह-तरह से परेशान किया। काम नहीं मिलने दिया, एक साल तक रोज 1500 रु. जुर्माना भी लगाया, मेल मेकअप आर्टिस्ट्स से काम कराने का दबाव भी बनाया। लेकिन चारू हारी नहीं, उन्होंने एसोसिएशन को सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा, चार साल तक लड़ाई लड़ी और जीतीं। बॉलीवुड में काम करने की उन्हें इजाजत मिली। लेकिन, ये लड़ाई वास्तव में सिर्फ चार साल की नहीं थी। लाखों की मेकअप किट से लेकर कोर्स करने तक, चारू ने अपना सबकुछ दांव पर लगाकर ये आर्ट सीखा था।

पढ़िए, एक फीमेल मेकअप आर्टिस्ट के बॉलीवुड में संघर्ष, जीत और छा जाने की कहानी, खुद चारू की जुबानी…

सबसे पहला मेकअप दोस्त का, 250 रु. भी मिले

कहानी शुरू होती है हरियाणा से जहां चारू खुराना का जन्म हुआ। 3-4 साल की हुईं तो परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। चारू को हमेशा से ही पढ़ाई में कम और आर्ट्स में ज्यादा रुचि थी। 12वीं तक आते-आते चारू को मेकअप करने में रुचि जागी। छुट्टियों के दिनों में मैगजीन और टीवी में खूबसूरत मॉडल्स को देखकर इरादे और मजबूत होते गए। एक दिन अपना ऐसा आई मेकअप किया कि साथ रहने वालीं दोस्त वैसा ही तैयार करने के लिए पैसे देने के लिए भी राजी हो गईं।

अपनी दोस्त का आई मेकअप करने पर चारू को 250 रुपए मिले, जो उनकी पहली फीस थी। कभी घर में मां को सजाया तो कभी शादी में जाने वाले लोगों को सजाया। पहली कमाई की खुशी और लोगों की सराहना…लेकिन टेक्निकल नॉलेज के बिना ये सपना पूरा करना नामुमकिन था। इस शौक को अब चारू प्रोफेशन में बदलना चाहती थीं। आगे की कहानी और संघर्ष अब पढ़िए खुद चारू खुराना की जुबानी

सीखने की जद्दोजहद में 6 महीने करना पड़ा इंतजार

साल 2000 के समय कोई प्रोफेशनल मेकअप कोर्स नहीं था। उस समय दिल्ली की एक फेमस मेकअप आर्टिस्ट थीं, विद्या सिकारी, जिनके पास मैं गई। उन्होंने ये कहकर इनकार कर दिया कि हमारा इंस्टीट्यूट नहीं है। मैं रोज उनके सैलून के रिसेप्शन में जाकर बैठती और उनके हां कहने का इंतजार करती।

शादियों का सीजन था तो वहां कई औरतें आती थीं, जिनका मेकअप देखकर मेरा और सीखने का मन करता था। विद्या मुझसे पूछती थीं कि क्यों आई हो और मेरा हर बार एक ही जवाब होता था। ऐसे ही मैं 6 महीने तक उनके सैलून के रिसेप्शन में बैठी रही। 6 महीने बाद पता नहीं क्या हुआ कि उन्होंने मुझसे कहा कि वो 1-2 घंटे की क्लास के लिए 11 हजार रुपए चार्ज करेंगी।

2000 में ये एक बहुत बड़ी रकम थी, वो भी सिर्फ एक क्लास की। बेसिक ट्रेनिंग के लिए मुझे 20-30 क्लास लेनी होतीं। वो शायद ये चाहती थीं कि ज्यादा फीस सुनकर मैं इस प्रोफेशन में आने का ख्याल छोड़ दूंगी। मैं मान गई, लेकिन कहा कि फीस आपकी मर्जी की होगी, लेकिन टाइम और दिन मैं डिसाइड करूंगी।

मेकअप प्रोडक्ट खरीदने के लिए मां ने बेच दिए अपने गहने

मेरी पहली क्लास हुई कि कौन सा प्रोडक्ट इस्तेमाल करना है। मैंने पहली क्लास के 11 हजार रुपए सिर्फ इसलिए दिए, क्योंकि उन्होंने मुझे प्रोडक्ट बताए। उन्होंने खुद के प्रोडक्ट लाने को कहा। उन्होंने जो प्रोडक्ट बताए वो इंडिया में मिलते ही नहीं थे, जिनका खर्च था लाख रुपए।

बिना प्रोडक्ट के दूसरी क्लास नहीं होती। एक महीना ऐसे ही बीत गया। उस समय मेरे पापा की फाइनेंशियल कंडीशन बहुत खराब थी। मैंने मम्मी के आगे जिद की तो उन्होंने बिना किसी को बताए अपने गहने बेच दिए। चंद क्लास करने के बाद ही मैंने क्लासेस लेनी बंद कर दिया।

बिना सैलरी 2 साल किया काम, कभी पोंछा लगाया तो कभी सफाई की

एक दिन मैं विद्या मैम के पास गई और उनसे कहा आप मुझे सैलेरी मत देना, लेकिन 2 साल तक आप मुझे काम पर रख लो। वो मान गईं। रोज 9-10 घंटे उन्हें असिस्ट करती थी, जिससे हाथ में सफाई आ गई। नई थी तो कभी कोई पोंछा लगवाता, तो कभी सफाई करवाता था। ये सब भी किया, लेकिन कभी अपने टारगेट से नहीं भटकी।

कैसे फिल्मों से जुड़ा चारू खुराना का रिश्ता?

ये 2001-02 के बीच की बात है। एक बार उनके पास बॉम्बे के प्रोडक्शन हाउस से ऐड शूट का काम आया था। 100 लोगों का मेकअप करना था तो विद्या दीदी ने पूरी टीम भेजी, जिसमें मैं भी थी। शूटिंग देखी तो मुझ में बहुत दिलचस्पी जागी। तब मुझे एहसास हुआ कि मेकअप सिर्फ सैलून या ब्राइडल मेकअप तक सीमित नहीं है।

हेयरस्टाइल और ड्रेपिंग सीखने के लिए विद्या दीदी ने मुझे बॉम्बे जाने की सलाह दी। कॉल करके डीटेल ली तो पता चला 45 दिन के लिए 50 हजार रुपए फीस थी। मेरे पास इतने पैसे नहीं थे। शूटिंग के दौरान मेरी कुछ लोगों से दोस्ती हुई थी। एक दिन मैंने प्रोडक्शन मैनेजर को कॉल करके कहा कि मैं मुंबई आना चाहती हूं अगर कोई काम हो तो बताना।

उस समय उनके पास एक ऐड शूट का काम था तो उन्होंने मुझे कहा आ जाओ 3 दिन का काम है। पैसे की बात नहीं हुई, लेकिन मैं पहुंच गई। शूटिंग के बाद मुझे 15 हजार रुपए मिले। मैं बहुत खुश हुई। थोड़ा काम मिलता गया और फीस निकल आई। मैंने हेयरकोर्स के लिए पॉपुलर हेयरस्टाइलिस्ट भरत एंड डोरिस के पास एडमिशन ले लिया।

फेडरेशन ने 1 साल तक रोज लिया फाइन और नहीं दी मेंबरशिप

मेरे भैया मुंबई में ही टेलीविजन इंडस्ट्री में स्ट्रगलिंग एक्टर थे, तो मैं भी यहीं सेटल हो गई। मैं सिर्फ 17 साल की थी। शुरू-शुरू में कम काम था तो दिक्कत नहीं हुई, लेकिन काम बढ़ा तो दिक्कत बढ़ने लगीं। एक बार की बात है, एक ऐड शूट के दौरान कुछ लोग मेंबरशिप चेक करने पहुंचे कि कौन एसोसिएशन का मेंबर है और कौन नहीं है।

मैं वैनिटी में मेकअप कर रही थी, वो लोग आए और कहा आप अपना कार्ड दिखाओ। मैंने बिजनेस कार्ड दिखाया तो कहने लगे ये नहीं यूनियन का कार्ड चाहिए। मैंने कहा, यूनियन का कार्ड नहीं है। उन लोगों ने कहा कि आप मुंबई में काम नहीं कर सकतीं। यहां का नियम है कि अगर आप यूनियन के मेंबर नहीं हो तो काम नहीं कर सकते। आपको फाइन भरना पड़ेगा, 1500 रुपए। मैंने फाइन भर दिया।

क्या है यूनियन का काम?

फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले सभी आर्टिस्ट को यूनियन में रिजिस्ट्रेशन करवाकर मेंबरशिप लेनी होती है। रजिस्टर्ड मेंबर को ही इंडस्ट्री में काम करने की परमिशन होती है। यूनियन के लोग सभी आर्टिस्ट से जुड़ी शिकायतों पर भी काम करते हैं।

एक साल तक रोज 1500 रुपए फाइन भरना पड़ा

मैं कार्ड बनवाने के लिए यूनियन के ऑफिस गई। उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि अभी हम किसी को मेंबर नहीं बना रहे हैं। मैंने पूछा बिना कार्ड काम कैसे करेंगे। उन्होंने कहा, काम नहीं कर पाओगे आप। मुझे रोज 1500 रुपए फाइन भरना पड़ता था और सेट पर जाने पर भी पाबंदी थी।

1 साल के बाद रूल्स और स्ट्रिक्ट हो गए। कहा गया कि किसी यूनियन के मेंबर को अपने साथ काम पर रखो। मैंने 1 साल ये भी किया और अपनी सैलरी से उस मेंबर को पैसे दिए। मैं हेयर और मेकअप दोनों करती थी। कई बार साथ काम करने वाला ही मेरी शिकायत कर देता था कि ये मेकअप और हेयर दो लोगों का काम करती हैं। यूनियन के लोगों ने कहा कि दो काम के लिए दो लोगों को हायर करो। अगर एक सैलेरी में तीन लोगों को देती तो किसी का भी पेट नहीं पलता।

लड़कियों को मेंबरशिप नहीं देते थे फेडरेशन के लोग

एक दिन में अंधेरी के फेडरेशन के ऑफिस गई। मैंने पूछा कि ये कैसे रूल्स हैं। आप मेंबर बना नहीं रहे हो और दो लोगों को रखने की डिमांड कर रहे हो। सैलेरी कैसे दे पाऊंगी। ढाई साल हो गए हैं अब तो मेंबरशिप दो। मैं उस समय सिर्फ 19 साल की थी। उन्होंने मुझे समझाया कि हम मेकअप आर्टिस्ट में लड़कियों को मेंबरशिप देते ही नहीं हैं। उस वक्त सिर्फ इतनी समझ थी कि पैसे कहां से आएंगे, रेंट कैसे भरेंगे, पेट कैसे पलेगा।

मैंने कहा कि मेकअप नहीं तो हेयर आर्टिस्ट की मेंबरशिप दे दो, उन लोगों ने इससे भी इनकार कर दिया। कहने लगे तुम महाराष्ट्र की नहीं हो पहले 15 साल का डोमेसाइल सर्टिफिकेट लाओ। ये कैसा लॉजिक है। मैंने मां और भाई के बिजली बिल से लेकर हर एक डॉक्यूमेंट दिखाया, लेकिन वो माने ही नहीं। मैं बार-बार गई तो वो लोग मुझसे रूड बिहेव करने लगे।

मुंबई छोड़ना पड़ा, 2-3 साल दिल्ली में काम किया

मेरा मन खट्टा हो गया। मेरे मम्मी-पापा ने कहा तुम दिल्ली आकर ही काम कर लो। 2005 में मैंने सामान बांधा और दिल्ली वापस आ गई। मैंने घर में ही एक कमरे को मेकअप स्टूडियो बनाकर छोटे-मोटे काम किए। फैशन शो, शूट का काम किया। 2-3 सालों तक मैंने दिल्ली में ही काम किया।

एक बार मुझे सिनेमा मेकअप स्कूल का पता चला, जो अमेरिका में था। मेल से कॉन्टैक्ट किया तो पता चला उनके पास बहुत एडवांस कोर्स थे। मुझे दिलचस्पी जगी। उस समय तक मैंने पैसे जोड़ लिए थे और नाम भी बना लिया था।

शादी और करियर में से करियर चुना

जब घरवालों से पूछा तो उन्होंने कहा तुम्हारी उम्र 25 हो गई है। शादी का समय है और हमारे पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि हम तुम्हारा कोर्स और शादी दोनों करवाएं। मैंने कहा शादी मैं खुद कर लूंगी, आप पढ़ा दो। यहां हजारों का नहीं लाखों का सवाल था। भाई ने सपोर्ट किया और पेरेंट्स को समझाया। शादी टाली और उसके पैसों से मेकअप कोर्स किया।

विदेश जाकर किया 32 लाख का मेकअप कोर्स

2008 में उस कोर्स की फीस 32 लाख रुपए थी। इसमें रहने का खर्च, आना-जाना सब शामिल था। पैसे जोड़ने के लिए मैंने सुबह शाम हर छोटा-बड़ा काम किया। मैंने एक दिन 100-100 किलोमीटर तक गाड़ी चलाई काम के लिए। आखिरकार घरवालों से 10-15 लाख रुपए मिले। कुछ मैंने लोन लिया कुछ मेरे अंकल ने मदद दी। 2009 में मैं कोर्स करके वापस आ गई। मैंने प्रोस्थेटिक और 3D मेकअप सीखा था, जो इंडस्ट्री में ही काम आता।

कमल हासन के साथ की पहली फिल्म

मैंने सोचा अब समय बीत चुका है क्या पता सबकी सोच बदल गई हो। मुझे उम्मीद थी कि अब इंडस्ट्री बदल चुकी होगी, लड़का- लड़की का फर्क बंद हो गया होगा, लेकिन मैं गलत थी। जिनसे मैंने सीखा था वो उस समय कमल हासन जी की फिल्म कर रहे थे। उन्होंने कमल हासन से कहा कि इस लड़की काम अच्छा है, कभी प्रोस्थेटिक या 3D की जरुरत है तो इसे रख लेना। कमल हासन जी ने एक बार मुझे प्रोजेक्ट के सिलसिले में बुलाया। ट्रायल हुआ, लुक तैयार किए गए, एक महीने मैंने लग के काम किया, लेकिन वो फिल्म कभी बनी ही नहीं। पुराने दोस्तों से मदद मांगी कि काम हो तो बताना। एक-दो ऐड भी किए। कुछ समय बाद कमल हासन जी ने वेडनसडे के रीमेक इन्नाड़ु के लिए मुझे दोबारा बुलाया।

सेट पर आकर परेशान करते थे फेडरेशन के लोग

30-35 दिन कोई दिक्कत नहीं हुई। शूटिंग हैदराबाद में हुई। मुझे लगा इंडस्ट्री बदल चुकी है। अचानक एक दिन फेडरेशन वाले मेरा लाइसेंस देखने आ गए। शूटिंग रुक नहीं सकती थी क्योंकि प्रोड्यूसर्स के पैसे लगे होते हैं, आर्टिस्ट की डेट्स होती हैं। 200-300 लोग काम करते हैं। उन लोगों ने मुझसे 21 हजार रुपए फाइन लिया और रसीद तक नहीं दी। मैंने रसीद मांगी तो उन्होंने चंदे की रसीद थमा दी। उसमें लिखा था कि मैंने पैसे डोनेट किए हैं। शूटिंग रोकना ठीक नहीं लग रहा था तो मैंने 15 दिन में शूटिंग पूरी की।

फ्री होते ही में फेडरेशन के ऑफिस गई। मुझे धीरे-धीरे चीजें समझ आने लगी थीं। मैंने नियमों की कॉपी मांगी। अगर उनके नियमों में लिखा होता कि लड़की को मेंबरशिप नहीं मिलेगी तो मैं समझ जाती। वो अड़ गए कि मेंबरशिप नहीं मिलेगी।

पुलिस केस और सालों की लड़ाई

मैं अंधेरी पुलिस स्टेशन गई और वहां शिकायत दर्ज करवाई कि ये लोग मेरा हैरेसमेंट कर रहे हैं और मुझे मेंबर नहीं बना रहे हैं। मैं काम कैसे करूंगी। यूनियन बहुत पॉवरफुल है, इसमें 3-4 हजार लोग हैं। उनका अपना एक माफिया गैंग चलता था। पहले सिर्फ बोलने में शिकायत दर्ज नहीं करवाई जाती थी। मेरे पास कोई आधार नहीं था कि वो मेरी शिकायत दर्ज करते। इसके बाद मैं वुमन कमिशन में गई।

मेरे लिए पैसे कमाना बहुत जरूरी था, क्योंकि मैं अपने मां-बाप की पूरी पूंजी लगा चुकी थी। मेरी शादी की उम्र थी तो सोसाइटी का भी बहुत प्रेशर था और तीसरा कि मैं विदेश से पढ़कर आई थी कुछ काम करने के लिए।

नेशनल कमिशन दिल्ली में यूनियन के खिलाफ शिकायत

मुंबई के बाद 2009 में मैंने नेशनल कमिशन दिल्ली में शिकायत की। कमल हासन के साथ काम करने के बाद काम के ऑफर अच्छे आने लगे थे, लेकिन उनका सिस्टम यही था कि साथ में यूनियन मेंबर रखना पड़ेगा। मैं अपने साथ एक हेयर आर्टिस्ट और एक मेकअप आर्टिस्ट रखती थी, क्योंकि पैसे कमाने थे और घर खर्च तो चलाना था।

बिना मेंबरशिप के यही एक तरीका था। मैंने चेन्नई में अनुष्का के साथ काम किया, विक्रम जी के साथ काम किया, विजय सर के साथ काम किया। मेकअप मैं करती थी, लेकिन मुझे सेट पर जाने की अनुमति नहीं थी, वहां दिनभर असिस्टेंट रहते थे। ऐसे में हमारी सैलेरी भी डिवाइड हो जाती थी। कुछ समय बाद यूनियन के लोग मुझे वैनिटी में बैठने पर भी परेशान करने लगे। बॉम्बे के यूनियन वालों ने चेन्नई की यूनियन को कॉल कर रहा कि चारू खुराना को काम मत करने दो। मेरे खिलाफ गैंगवॉर छिड़ गई थी। यूनियन वालों ने मुझे बायकॉट करने का प्लान बनाया।

यूनियन के 200 लोग ने सेट पर आकर बनाया था दबाव

चेन्नई मेकअप यूनियन के 200 लोग मेरे खिलाफ सेट पर आकर खड़े हो गए। ये बहुत शर्मिंदगी की बात थी कि एक लड़की बाहर से पढ़कर आई है और उसे दबाया जा रहा है। कोई भी प्रोड्यूसर किसी मेकअप आर्टिस्ट के लिए खड़ा नहीं होता। उसने करोड़ों लगाए हैं वो एक मेकअप आर्टिस्ट के लिए शूटिंग क्यों रोकेगा। उनके पास तो दूसरे मेकअप आर्टिस्ट को बुलाने का ऑप्शन होता है।

ढाई साल तक इंडस्ट्री में नहीं मिला काम

इन्नाड़ु फिल्म करने के बाद मुझे यूनियन के कहने पर इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया। मैं अपना सामान बांधकर दोबारा दिल्ली आ गई। बीच में ही मेरी शादी हो गई। शादी के बाद 2010 में मेरा केस सुप्रीम कोर्ट में रजिस्टर हुआ। नेशनल कमिशन की तरफ से मेरा केस ज्योतिका कालरा ने लड़ा था, जो एक नामी वकील थीं।

उन्होंने मुझसे बहुत कम फीस ली। अलग-अलग फाइल खुलीं। डायरेक्ट फैसला मिलने के बजाय सालों के चिट्ठे खुलते हैं। एक-एक नियम की तह तक जाना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में जाना एक बड़ा संघर्ष रहा। बाहर बैठकर अपने नंबर का इंतजार करते रहो, लेकिन तीन-चार मामलों में ही दिन निकल जाता था, फिर अगले दिन अपने नंबर के लिए दोबारा इंतजार करना पड़ता था।

सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटते हुए ही शादी हुई और दो बच्चे

मैं प्रेग्नेंट हुई। मेरे दोनों बच्चों की डिलीवरी सुप्रीम कोर्ट की सीढ़ियां चढ़ते हुए हुई है। मैं 9 महीने की प्रेग्नेंट थी, धूप, गर्मी, पसीने में अपने नंबर का इंतजार करना बहुत दर्दनाक एक्सपीरिएंस था। मैं इमोशनली, मेंटली और फिजिकली किसी दूसरे पर डिपेंडेंट थी, जो मेरे लिए मुश्किल था। कई बार लगता था कि केस से पीछे हट जाओ। मेरे मां-बाप ने मेरा बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि सही बात के लिए हमेशा खड़े रहो। 2014 में मेरे पिता 70 साल के थे, जो मेरे साथ रोज सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटते थे। वो कहते थे तुम इतिहास रचोगी।

4 सालों की लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय

आखिरकार लंबे इंतजार के बाद फरवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया। उसके बाद अचानक मैं लाइमलाइट में आ गई थी। ये सिर्फ मेरी नहीं बल्कि इंडस्ट्री में काम करने वाली दर्जनों महिलाओं की लड़ाई थी।

जीत के बाद भी आसान नहीं थी राह

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी यूनियन ने मुझे मेंबरशिप देने से इनकार कर दिया। मैं एक दिन बुरी तरह टूट गई। दूसरा बच्चा पेट में था और इमोशनली टूटते हुए मैंने कोर्टरूम में जज से कहा, मेरी स्थिति देखिए। 4 साल हो चुके हैं। मैं हर सुनवाई में पहुंची हूं, क्यों। इस इंतजार में कोई आदमी मर जाए। जज ने मुझसे कहा, आप अभी चैक दीजिए हम आपकी अभी मेंबरशिप करवाएंगे। मैंने सुप्रीम कोर्ट में ही मेंबरशिप की फीस भरी और उन्होंने कहा कि 30 दिन के अंदर आपको मेंबरशिप मिलेगी।

दुनिया भर में हुई थी चारू की जीत की चर्चा

यूनियन के खिलाफ कोर्ट केस जीतने के बाद चारू देश की पहली रजिस्टर्ड महिला मेकअप आर्टिस्ट बनीं। चारू की इस जीत की चर्चा लंदन, पेरिस, मिलान फैशन वीक समेत दुनिया के हर कोने पर हुई। 65 साल पुराने नियम को चैलेंज करना और उस पर जीत हासिल करना एक ऐतिहासिक जीत थी। चारू से पहले मुंबई में कोई ऐसी लड़की नहीं थी, जिसे यूनियन ने मेंबरशिप दी थी। उनके बाद देश की कई अन्य महिलाओं के लिए भी इंडस्ट्री के रास्ते खुले।

बाहुबली में काम करना एक यादगार अनुभव

जब मैंने बाहुबली फिल्म में काम किया उस वक्त मेरा बेटा बहुत छोटा था। मुझे बेटे को ब्रेस्ट फीड करवाना होता था, जिसके लिए सेट पर सारे इंतजाम किए गए थे। उन्होंने मेरे बच्चे को भी सेट पर अनुमति दी और पूरी प्राइवेसी दी।

इसी तरह की हस्तियों की कहानी जानने के लिए नीचे दी गई खबर पढ़ें-

पिता सुन नहीं पाते थे, मां को दिखता नहीं था:3.8 फीट के बरकत अब कर्नाटक के कॉमेडी खिलाड़ी, कभी ऑर्केस्ट्रा में करते थे काम

आज हम बात करेंगे एक ऐसे कलाकार की जिसका कद महज 3.8 फीट है, मगर जिंदगी में मुश्किलें बड़ी-बड़ी झेलीं। नाम है बरकत अली। जब 5-6 साल के थे तो गांव से सर्कस वाले चुपचाप इन्हें उठा ले गए। घरवाले काफी झगड़े के बाद इन्हें छुड़ा पाए। बचपन में मुंह से खून आने की बीमारी थी और जुबान दो हिस्सों में कटी हुई थी। पिता सुन नहीं पाते थे और मां को रात को दिखना बंद हो जाता था। ऑर्केस्ट्रा में 50 रु. रोज में काम किया। लोग चिढ़ाते थे कि बौना है तेरी शादी नहीं होगी, लेकिन बरकत ने शादी की वो भी लव मैरिज, एक सामान्य कद की लड़की से। किस्मत थोड़ी पलटी तो फिल्मों में काम मिला, एक फिल्म के 3 लाख तक मिलने लगे। भारत ही नहीं, लंदन में भी इनके नाम के चर्चे हुए।

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48 साल से नहीं ली एक भी छुट्टी: मां की मौत के दिन भी करते रहे अमिताभ का मेकअप, शूटिंग के बाद अंतिम संस्कार किया

जंजीर से लेकर गुडबाय तक पिछले 48 साल से अमिताभ बच्चन के साथ एक इंसान है। नाम है दीपक सावंत। ये बिग बी के मेकअप आर्टिस्ट हैं और पिछले 48 सालों से बिना एक भी दिन छुट्टी लिए ये काम कर रहे हैं। काम के लिए दीपक के डेडिकेशन को इसी बात से समझा जा सकता है कि जब उनकी मां की मौत की खबर उनके पास पहुंची, वो अमिताभ बच्चन का ही मेकअप कर रहे थे।

परदे के पीछे के इस बड़े कलाकार की कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें-

सबसे महंगी राजस्थानी फिल्म बनाकर दिवालिया हुए थे सागर:जिस टॉकीज के बाहर सालों तक चाय बेची, उसी के पर्दे पर हीरो बनकर आए

अपने शुरुआती दिनों में ये जयपुर के लक्ष्मी मंदिर टॉकीज के बाहर चाय बेचते थे। छह साल तक ये सिलसिला चला। फिर वक्त ने करवट ली और एक दिन वो आया कि इसी लक्ष्मी मंदिर टॉकीज में वो फिल्म लगी, जिसमें ये हीरो थे। एक चाय वाले से एक्टर-डायरेक्टर बनने की सागर की कहानी काफी दिलचस्प है। हीरो बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए इन्हें सालों तक स्ट्रगल करना पड़ा। पहले दूध बेचते थे, फिर टॉकीज के बाहर चाय, फिर फिल्मों के सेट पर स्पॉट बॉय बने, ऑफिस बॉय बने, ड्राइवर भी रहे, फिर असिस्टेंट डायरेक्टर और एक दिन फिल्म के हीरो बन गए।

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325 तरह से साड़ी बांधने वाली डॉली जैन:घरवालों के सोने के बाद रात 3 बजे तक प्रैक्टिस करती थीं, अब एक्ट्रेसेस को पहनाती हैं साड़ी

खुद साड़ी पहनने से नफरत करने वाली डॉली ने सुपरस्टार श्रीदेवी के कहने पर साड़ी पहनाने को अपना प्रोफेशन बनाया और आज वो हर बड़ी एक्ट्रेस की फेवरेट हैं।डॉली की क्लाइंट लिस्ट में दीपिका, आलिया से लेकर नयनतारा तक कई बड़ी एक्ट्रेसेस शामिल हैं। अंबानी के घर में शादी हो या किसी फिल्म स्टार की, दुल्हन को साड़ी पहनाने का काम इनका ही होता है। डॉली 325 तरह की साड़ी बांधना जानती हैं, ये वर्ल्ड रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज है। एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है, मात्र 18.5 सेकेंड्स में साड़ी पहनाने का।

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हेमा मालिनी से श्रीदेवी तक की बॉडी डबल रहीं रेशमा- 5 महीने की प्रेग्नेंट थीं तब स्टंट के लिए पहली मंजिल से लगा दी थी छलांग

रेशमा बॉलीवुड की पहली स्टंट वुमन हैं। पहले लड़के ही हीरो और हीरोइन दोनों के बॉडी डबल का काम करते थे, लेकिन रेशमा ने पहली बार फिल्मी पर्दे पर किसी एक्ट्रेस के लिए बॉडी डबल का काम कर दुनिया को ये दिखाया कि औरतें भी भारी-भरकम एक्शन सीन कर सकती हैं। इनकी मजबूरी और हौंसले को इस बात से आंका जा सकता है कि CID फिल्म के एक सीन के लिए इन्होंने पहली मंजिल से छलांग लगा दी थी। वो भी तब जब ये 5 महीने की प्रेग्नेंट थीं। दिलचस्प बात ये है कि खुद रेशमा का चेहरा कभी बड़े पर्दे पर नहीं दिखा, लेकिन उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बन चुकी है।

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