Tuesday, November 29, 2022
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नासा के मून मिशन पर फिर खतरा: तूफान के बीच लॉन्चिंग की तैयारी, आज 11.34 बजे उड़ान भरेगा रॉकेट


फ्लोरिडा4 मिनट पहले

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा अपने मून मिशन ‘आर्टेमिस-1’ को आज तीसरी बार लॉन्च करने की कोशिश करेगी। रॉकेट सुबह 11.34 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा। इससे पहले 29 अगस्त और 3 सितंबर को भी लॉन्चिंग के प्रयास किए गए थे। हालांकि तकनीकी गड़बड़ी और मौसम खराब होने के चलते ये कामयाब नहीं हुए थे।

नासा के मुताबिक, हाल ही में फ्लोरिडा में आए तूफान निकोल ने मिशन को नुकसान पहुंचाया है। स्पेसक्राफ्ट का एक पार्ट ढीला होकर निकल गया है। इसकी वजह से लिफ्ट ऑफ में दिक्कत जा सकती है। वैसे तो लॉन्च से पहले इसे फिक्स कर दिया जाएगा, लेकिन परेशानी आने पर नई तारीख 19 या 25 नवंबर तय की जाएगी।

आगे पढ़िए आर्टेमिस मिशन क्या है, यह अपोलो मिशन से कैसे अलग है और इसकी लागत कितनी होगी। इससे पहले आप हमारे पोल में हिस्सा ले सकते हैं…

नासा के आर्टेमिस मिशन को 5 पॉइंट्स में समझिए…

1. इंसान को चांद पर भेजेगा आर्टेमिस मिशन

  • अमेरिका 53 साल बाद एक बार फिर आर्टेमिस मिशन के जरिए इंसानों को चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है। इसे तीन भागों में बांटा गया है। आर्टेमिस-1, 2 और 3। आर्टेमिस-1 का रॉकेट चंद्रमा के ऑर्बिट तक जाएगा, कुछ छोटे सैटेलाइट्स छोड़ेगा और फिर खुद ऑर्बिट में ही स्थापित हो जाएगा।
  • 2024 के आसपास आर्टेमिस-2 को लॉन्च करने की प्लानिंग है। इसमें कुछ एस्ट्रोनॉट्स भी जाएंगे, लेकिन वे चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद के ऑर्बिट में घूमकर वापस आ जाएंगे। इस मिशन की अवधि ज्यादा होगी।
  • इसके बाद फाइनल मिशन आर्टेमिस-3 को रवाना किया जाएगा। इसमें जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स चांद पर उतरेंगे। यह मिशन 2025 या 2026 में लॉन्च किया जा सकता है। पहली बार महिलाएं भी ह्यूमन मून मिशन का हिस्सा बनेंगी। इसमें पर्सन ऑफ कलर (श्वेत से अलग नस्ल का व्यक्ति) भी क्रू मेम्बर होगा। एस्ट्रोनॉट्स चांद के साउथ पोल में मौजूद पानी और बर्फ पर रिसर्च करेंगे।

2. आर्टेमिस-1 मिशन नासा के लिए टेस्ट फ्लाइट

  • आर्टेमिस-1 प्रमुख मिशन के लिए एक टेस्ट फ्लाइट है, जिसमें किसी अंतरिक्ष यात्री को नहीं भेजा जाएगा। इस फ्लाइट के साथ वैज्ञानिकों का मकसद चांद पर एस्ट्रोनॉट्स के लिए सही हालात सुनिश्चित करना है। मिशन के तहत नासा का ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) मेगारॉकेट’ और ‘ओरियन क्रू कैप्सूल’ चंद्रमा पर पहुंचेंगे।
  • आमतौर पर क्रू कैप्सूल में एस्ट्रोनॉट्स रहते हैं, लेकिन इस बार यह खाली रहेगा। मिशन 42 दिन 3 घंटे और 20 मिनट का है, जिसके बाद यह धरती पर वापस आ जाएगा। स्पेसक्राफ्ट कुल 20 लाख 92 हजार 147 किलोमीटर का सफर तय करेगा।

3. 50 साल पुराने अपोलो मिशन से अलग है आर्टेमिस

  • अपोलो मिशन की आखिरी और 17वीं फ्लाइट ने 1972 में उड़ान भरी थी। इस मिशन की परिकल्पना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जे एफ केनेडी ने सोवियत संघ को मात देने के लिए की थी। उनका लक्ष्य अमेरिका को साइंस एंड टेक्नोलॉजी की फील्ड में दुनिया में पहले स्थान पर स्थापित करना था। हालांकि करीब 50 साल बाद माहौल अलग है।
  • अब अमेरिका आर्टेमिस मिशन के जरिए रूस या चीन को मात नहीं देना चाहता। नासा का मकसद पृथ्वी के बाहर स्थित चीजों को अच्छी तरह एक्सप्लोर करना है। चांद पर जाकर वैज्ञानिक वहां की बर्फ और मिट्टी से ईंधन, खाना और इमारतें बनाने की कोशिश करना चाहते हैं।

4. आर्टेमिस मिशन की लागत 7,434 अरब रुपए
नासा ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल के एक ऑडिट के अनुसार, 2012 से 2025 तक इस प्रोजेक्ट पर 93 बिलियन डॉलर यानी 7,434 अरब रुपए का खर्चा आएगा। वहीं, हर फ्लाइट 4.1 बिलियन डॉलर यानी 327 अरब रुपए की पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट पर अब तक 37 बिलियन डॉलर यानी 2,949 अरब रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

5. दशकों से टल रहा नासा का ह्यूमन मून मिशन

  • SLS रॉकेट का प्लान 2010 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में बना था। वे एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर भेजना चाहते थे, लेकिन मिशन में देरी के बाद सरकार ने इसे बंद करने का फैसला लिया।
  • हालांकि अमेरिकी संसद ने मिशन को जिंदा रखा। नासा को SLS रॉकेट और ओरियन क्रू कैप्सूल की प्लानिंग को कंटिन्यू रखने के लिए कहा गया। इसके तहत रॉकेट की लॉन्चिंग 2016 में होनी थी। फिर से देरी के बाद डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने 2017 में आर्टेमिस मिशन को ऑफिशियल नाम दिया।
  • 2019 में नासा ने बताया कि रॉकेट को तैयार करने में एक साल और लगेगा। इसी साल एक सरकारी रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि नासा के मिशन में हो रही देरी से सरकार को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद आर्टेमिस मिशन को सफल बनाने के प्रयास जारी हैं।

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